हिमाचल के दो स्कूलों काे मिला राष्ट्रीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार

शिक्षा समाचार

प्रदेश के दो स्कूलों नंद और धमून को मंगलवार को राष्ट्रीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार मिला। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने दोनों स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए देशभर से चुने गए 52 स्कूलों में से बिलासपुर जिला की राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंद तीसरे नंबर पर जबकि सिरमौर जिला की राजकीय माध्यमिक पाठशाला धमून आठवें नंबर पर रही है।

इन दोनों स्कूलों को 50-50 हजार रुपये का ईनाम दिया गया। जिला सिरमौर के शिक्षा खंड राजगढ़ के माध्यमिक विद्यालय धमून की मुख्य अध्यापिका पायल तोमर और स्कूल की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता मंत्री छात्रा सिमरन ने पुरस्कार प्राप्त किया।

जिला बिलासपुर की राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंद के जेबीटी आशाराम और विद्यार्थी मंनिंद्र सिंह से पुरस्कार प्राप्त किया। इस अवसर पर शिक्षा निदेशालय की ओर से संयोजक दलीप वर्मा भी मौजूद रहे।
इस स्कूल की सफाई देख रहेंगे हैरान

स्वच्छता में ही ईश्वर वास करते हैं। जहां सवच्छता है वहां लक्ष्मी और सरस्वती दोनों ही देवियों को वास रहता है। इसी पर अमल करते हुए सिरमौर के राजगढ़ उपमंडल में स्थित मिडल स्कूल धमून स्वच्छता के क्षेत्र में मिसान बन गया है।

स्कूल पहुंचना वाला हर शख्स यही कहता है कि वाह, स्वच्छता हो तो ऐसी। शिक्षकों और ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से स्कूल को आदर्श गुरूकुल के रूप में स्थापित किया है। यहीं वजह है कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल सम्मानित किया गया है।

पूरे देश के स्कूलों में हुए चयन में यह स्कूल आठवें पायदान पर रहा। स्कूल की मुख्य अध्यापिका पायल तोमर ने दिल्ली में पुरस्कार प्राप्त किया। धमून स्कूल गुजरे साल भी राष्ट्रीय स्तर का स्वच्छता पुरस्कार हासिल कर चुका है।

इस वर्ष देश के मात्र 52 स्कूलों का चयन हुआ है, जिसमें हिमाचल से दो स्कूल चुने गए हैं। चयन के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार इस स्कूल को 97 प्रतिशत अंक मिले हैं। गतवर्ष स्कूल को 84 प्रतिशत अंक मिले थे।

दिल्ली के लिए रवाना हुई पायल तोमर ने अमर उजाला को बताया कि स्कूल के नाम तीन बीघा भूमि है। जिसे तारबाड़ करके बंद किया गया है। स्कूल में चार यूनिट शौचालय के बने हैं। जिसमें दो लडकियों के लिए जबकि दो लड़कों के लिए है।
स्कूल में उगाते हैं सब्जियां

स्कूल में पानी पर्यामप्त मात्रा में उप्लब्ध है, इसलिए शौचालयों की साफ-सफाई भी अच्छी है। उन्होनें बताया कि प्लास्टिक पर स्कूल में प्रतिबंध है और जो कुछ आता है, उसे एकत्रित किया जाता है।

अन्य जैविक कचरे के लिए एक कम्पोस्ट पीट बनाया गया है। यही नहीं स्कूली बच्चों को शौचालय के प्रयोग और हाथों की सफाई की जानकारी दी जाती है। सभी बच्चे साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते है। स्कूल में कसिचन गार्डनिंग की जाती है, जिसमें घिया, कद्दू, लहसुन व खीरे इत्यादि उगाएं जाते है।

इन सब्जियों का प्रयोग मध्यान्ह भोजन में किया जाता है। मुख्य अध्यापिका ने इस उपलब्धि का श्रेय स्थानीय पंचायत के लोगों, स्कूल स्टाफ, स्कूली बच्चों तथा उनके अभिभावकों को दिया है।
स्कूल तक सीतित नहीं दैनिक आचरण

स्कूल का भवन बाहर से ही आकर्षित है। हरियाली से लवरेज स्कूल में बने शौचालय के बाहर दो तौलिएं हमेशा टंगे रहते हैं। यहां यह भी लिखा गया है कि शौचालय जाने के बाद हाथ हमेशा साबुन से धोएं।

कचरे को ठिकाने लगाने के लिए अलग सो प्रावधान है। स्कूल में सफाई ऐसी है कि एक तिनका भी न मिलें। सभी बच्चों ने स्कूल को स्वच्छ रखने की आदत डाल दी है।

स्कूल में पढ़ाया जा रहा स्वच्छता का पाठ सिर्फ स्कूल त ही सीमित नहीं है। बच्चों ने इसे अपने जीवन का अंग बना दिया है। वहीं, घर जाकर आस पड़ोस के लोगों को भी स्वच्छता के बारे जागरुक कर रहे हैं।

मुख्य अध्यापिका स्कूल में ही स्वच्छता रखना पर्याप्त नहीं है। इसका फायदा तभी है जब बच्चे अपने जीवन में यह स्वच्छता को ढालने के साथ ही अन्य लोगों को भी जागरुक करें।
निजी मॉडल स्कूल से कम नहीं नंद प्राथमिक पाठशाला

झंडूता उपमंडल के तहत आने वाला प्राइमरी स्कूल नंद किसी भी निजी मॉडल स्कूल से कम नजर नहीं आता। शिक्षकों की मेहनत ऐसा रंग लाई कि स्कूल को देश भर में पहली लाइन में खड़ा कर दिया। नंद प्राथमिक स्कूल को स्वच्छता क्षेत्र में देश में तीसरा स्थान मिला है।

शिक्षक आशाराम यह पुरस्कार लेंगे। मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार के लिए चयन के विभिन्न मापदंड अपनाता है। पेयजल की व्यवस्था, उसका रखरखाव, शौचालय सुविधा और उसका रखरखाव कैसे किया जा रहा है।

बच्चों के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया है आदि बातों के अलग-अलग नंबर तय किए होते हैं। इसके आधार पर हर गतिविधि के नंबर सर्वे टीम देती है। इस सर्वे में प्राइमरी स्कूल नंद